सूरत। शहर में हर वर्ष मानसून के दौरान खाड़ी में आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में हुई भारी बारिश के दौरान खाड़ी के ओवरफ्लो होने से शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बाढ़ के मूल कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई और खाड़ी के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले अवैध निर्माणों को तत्काल हटाने का निर्णय लिया गया।
गांधीनगर में आयोजित समीक्षा बैठक में सूरत के जिला कलेक्टर, शहर के विधायक, नगर आयुक्त एम. नागराजन, महापौर, स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष राजन पटेल तथा नगर निगम के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में भविष्य में बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
नगर निगम द्वारा पिछले वर्ष कराए गए विस्तृत सर्वेक्षण में सामने आया कि खाड़ी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र और उसके किनारों पर बड़ी संख्या में अवैध निर्माण, तटबंध और अतिक्रमण किए गए हैं।
इन निर्माणों के कारण खाड़ी की चौड़ाई कम हो गई है तथा पानी की निकासी बाधित हो रही है। परिणामस्वरूप भारी वर्षा के दौरान पानी वापस रिहायशी क्षेत्रों में भर जाता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है।
स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष राजन पटेल ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सोमवार से खाड़ी किनारे स्थित सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को हटाने का अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और खाड़ी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के लिए सभी अवरोधों को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा।
नगर आयुक्त एम. नागराजन ने कहा कि शहर की विभिन्न खाड़ियों के संरक्षण और विकास के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त हो चुके हैं और नगर निगम शीघ्र ही व्यापक कार्ययोजना पर अमल शुरू करेगा।
सोमवार से शुरू होने वाले इस विशेष अभियान पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हैं। यदि अवैध अतिक्रमणों को प्रभावी ढंग से हटाकर खाड़ी का प्राकृतिक बहाव बहाल किया जाता है, तो वर्षों से बाढ़ की समस्या से जूझ रहे सूरतवासियों को बड़ी राहत मिल सकती है।
साथ ही मानसून के दौरान होने वाले जान-माल और करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।
